ईश्वर का अस्तित्व है या नहीं ?Do GOD Exist or Not?

god, क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते है

क्या आपका अस्तित्व है ? अरे ! ईश्वर को तो छोड़िये क्या आप का खुद का अस्तित्व है ? आप सोच रहे होंगे की ये क्या प्रश्न पूछ लिया ?

कल्पना कीजिये कि एक व्यक्ति है जिसकी आँखे नहीं है , वह देख नहीं सकता , सुन भी नहीं सकता , सूंघ भी नहीं सकता , चख भी नहीं सकता और स्पर्श को भी महसूस नहीं कर सकता |

क्या उसके लिए इस दुनिया का भी कोई अस्तित्व है ? क्या उसके लिए आपका भी कोई अस्तित्व है ?

यदि किसी एक चीज का अस्तित्व वह स्वीकार कर सकता है तो वो है – खुद का , उसे खुद का अस्तित्व पता होता है |

अब इस बात का ईश्वर से क्या संबंध है ?

यह हम लेख के अंत में देखेंगे , जिस सवाल की खोज में आप यहाँ आये उसकी चर्चा शुरू करते है |

क्या आप ईश्वर को मानते है ?

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ईश्वर , क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते है
Image Credit-Outer Places

क्या ईश्वर है ?

ईश्वर के अस्तित्व होने न होने पर कोई भी अपने विचार रख सकता है , चाहे वह व्यक्ति अनपढ़ से अनपढ़ हो या पढ़ा लिखा , इस मामले में सबके अपने विचार है , सबके अपने तर्क है , कुछ के सामान्य तर्क है तो कुछ के विशेष , हम यहाँ सामान्य और विशेष दोनों प्रकार के तर्कों को देखेंगे , तो आइये सबसे पहले देखते हैं की ईश्वर अस्तित्व के सबंध में सामान्य तर्क कौनसा है जो हर व्यक्ति के लिए प्रस्तुत करना सहज है , आसान है |

ईश्वर अस्तित्व के पक्ष में सामान्य तर्क

जब भी किसी भी आस्तिक को आप पूछेंगे कि ईश्वर का अस्तित्व कैसे है ? क्या प्रमाण है कि ईश्वर है तब एक सामान्य आस्तिक व्यक्ति आपको कहेगा

दुनिया में कोई भी वस्तु बिना किसी के बनाये नहीं बनती , इसलिए इस ब्रम्हांड को भी किसी ने बनाया है और वह बनाने वाला ही ईश्वर है |

तब एक नास्तिक व्यक्ति झट से कहेगा कि फिर ईश्वर को किसने बनाया ? जिसका जवाब आस्तिक नहीं दे पाता क्यों कि वह अपने तर्क को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं करता और आसान से तर्क को बड़ी उलझन बना बैठता है , वह कौनसी गलती करता जानने के लिए देखिये इस तर्क सही स्वरूप क्या है ?



वास्तविक तर्क

वास्तव में यह सामान्य तर्क अपने आप में काफी विशेष है , इस तर्क का सही स्वरुप यह है , तर्क कहता है

दुनिया में कोई भी बनी हुयी वस्तु बिना किसी के बनाये नहीं बनती , ब्रम्हांड निर्मित वस्तु है इसलिए उसका कोई निर्माता भी है |

अब नास्तिक पूछता है कि फिर ईश्वर को किसने बनाया ? आस्तिक कहता है –

जो वस्तु निर्मित है , बनी हुयी है उसे बनाने वाला होता है , जो निर्मित नहीं उसे कोई बनाने वाला नहीं होता , ब्रम्हांड निर्मित वस्तु है अतः उसका कोई निर्माता भी है |

देखिये एक छोटी सी गलती होने पर एक प्रबल तर्क दुर्बल दिखने लगता है , नास्तिकों के प्रिय सवाल ईश्वर को किसने बनाया के अनेकों जवाब दिए जा सकते है लेकिन यहाँ पर विषय यह नहीं है , इसके लिए नीचे दिया गया आर्टिकल पढ़े

आस्तिक और नास्तिक में बहस

god,क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते है

ईश्वर अस्तित्व पर विशेष तर्क

तो आइये अब हम ईश्वर अस्तित्व के संबंध में कुछ विशेष तर्कों को देखते है , ईश्वर अस्तित्व के संबंध में महर्षि दयानन्द ने अपने ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश में यह तर्क दिया है जो कि अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है –
किसी भी वस्तु का अस्तित्व उसके गुणों से पता चलता है , गुणी की सत्ता गुणों से होती है , जैसे अग्नि का अस्तित्व उसके गुणों से प्रमाणित होता है , अग्नि में प्रकाश और तेज आदि गुण होने से उसके अस्तित्व का पता चलता है इसी तरह दुनिया में अनेकों वस्तुओं का अस्तित्व उनके गुणों से ही पता चलता है , उदाहरण के लिए हवा दिखाई नहीं देती लेकिन हम उसे स्पर्श कर सकते है , इसलिए उसमे स्पर्श का गुण होने से यह प्रमाणित होता है कि उसका अस्तित्व है , नमक, चीनी , गुड़ में स्वाद होने से उनके अस्तित्व का पता चलता है |

मान लीजिये कोई आपको चीनी देकर कहे कि ये नमक है , तब आप चखकर देखते हो तो आपको मीठापन महसूस होता है , आप कहते है ये नमक नहीं चीनी है , यानि  कि जिस वस्तु को आपने चखा उसमे नमक के गुणों का नहीं बल्कि चीनी के गुणों का अस्तित्व है जिस से यह प्रमाणित हो गया कि यह अमुक वस्तु चीनी है , इसलिए हर वस्तु का अस्तित्व उसके गुणों से होता है |

पढ़िए

कौनसे गुण ईश्वर को प्रमाणित करते हैं ?

अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस तरह चीनी का गुण मीठापन है , अग्नि का गुण तेज और प्रकाश आदि है इसी तरह ईश्वर के वे कौनसे गुण है जिनसे उसका अस्तित्व साबित होता है ?
जिस तरह चीनी में मिठास है , इमली में खटास है , अग्नि में प्रकाश , वायु में स्पर्श और जल में गीलापन है उसी तरह ईश्वर तत्व में चेतनता है , ज्ञान है , बल है ,दया है , न्याय है | इस तरह ईश्वर तत्व में अनेकों गुण है |
लेकिन अभी सोच रहे होंगे कि जैसे हम मिठास को जानकर चीनी का पता कर लेते है , उसी तरह ईश्वर के इन गुणों को हम कैसे पता कर सकते है और जब हम ईश्वर के इन गुणों को महसूस नहीं कर सकते तब ईश्वर का अस्तित्व कैसे साबित होता है ?

ईश्वर के गुणों का कैसे पता चला ?

वायु को हम स्पर्श से जान सकते है , चीनी को हम चखकर जान सकते है तो भला ईश्वर को जब हम किसी भी इन्द्रिय से नहीं जान सकते तो कैसे प्रमाणित हुआ कि ईश्वर है ?

  • ईश्वर को न चख सकते हैं
  • न सूंघ सकते है
  • न छू सकते हैं
  • न सुन सकते हैं और
  • न देख सकते हैं

फिर तो ईश्वर का कोई अस्तित्व ही नहीं है ?

जवाब

ईश्वर का गुण है ज्ञान , जिस तरह किसी लेखक को जब आप पढ़ते हो तब उसे आप किसी भी इन्द्रिय से प्रत्यक्ष नहीं कर सकते लेकिन उस लेखक कि बुद्धि का दर्शन उसकी लेखनी में आपको हो जाता है , यानि आप अपनी बुद्धि से उस लेखक का प्रत्यक्ष करते हो , क्यों लेखक का लेख बुद्धिपूर्वक लिखा गया है इसलिए आप एक बुद्धिमान लेखक के अस्तित्व को स्वीकार करते हो , यदि उसका लेख मूर्खता पूर्ण है तब आप एक मूर्ख लेखक का अस्तित्व स्वीकार करते हो |



यहाँ आपने लेखक के गुणों का प्रत्यक्ष किसी भी इन्द्रिय से नहीं किया बल्कि अपनी बुद्धि से किया है , इसी तरह इस सम्पूर्ण ब्रम्हांड में सूक्ष्म से सूक्ष्म और बड़ी से बड़ी रचनाओं में उस ईश्वर की कला का दर्शन होता है , उसकी बुद्धि या उसके ज्ञान का दर्शन होता है , इसलिए एक सर्वज्ञ सत्ता का होना स्वीकार करना चाहिए |

  • ईश्वर में स्पर्श गुण नहीं है
  • रूप नहीं है |
  • रस नहीं है |
  • गंध नहीं है |
  • शब्द नहीं है |

जब ईश्वर में ये गुण नहीं है तब उसका प्रत्यक्ष हमारी इन्द्रियों से क्यों होगा भला ? शुरुआत में हमने एक उदाहरण दिया था कि एक व्यक्ति की कोई भी इन्द्रिय काम नहीं करती है , यदि वो संसार के गुणों को अपनी इन्द्रियों से प्रत्यक्ष नहीं कर सकता तो इस कारण वह संसार के अस्तित्व को नकार नहीं सकता |
यहाँ पर बात थोड़ी उल्टी होकर भी वही है , यानि इसे ऐसे समझिये की वहाँ पर बात Active थी तो यहाँ पर Passive तरीके से है , हमारी इन्द्रियां ख़राब नहीं है लेकिन जिन गुणों को हमारी इन्द्रिय महसूस(sense) कर सकती है उनमे से कोई गुण ईश्वर में नहीं है ,दोनों ही जगह गुणों का प्रत्यक्ष नहीं हो रहा तब सबसे पहले दिया गया उदाहरण यहाँ Passive तरीके से काम करता है , क्या हम उस उदाहरण की तरह ईश्वर के अस्तित्व को नकार सकते हैं ?

ईश्वर के सभी गुणों का प्रत्यक्ष कैसे हो ?

god, क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते है

जिस तरह हम किसी लेखक की पुस्तक को पढ़कर उसके ज्ञान के अनुसार लेखक का अस्तित्व स्वीकार कर लेते है और उस लेखक से चाहे तो मिल भी सकते हैं जिस से उसके अन्य गुणों का प्रत्यक्ष भी हमें हो जाता है उसी तरह ईश्वर के सभी गुणों का प्रत्यक्ष कैसे होगा , यह एक स्वाभाविक प्रश्न है |

जैसे पानी को देखकर आप उसके विभिन्न गुणों का अनुमान लगा सकते है , वैज्ञानिक बुद्धि से पानी के बहुत सारी चीजों को जान सकते हैं लेकिन पानी को पीने पर ही उसका वास्तव स्वाद महसूस होता है , इसी तरह ईश्वर को प्राप्त करने पर ही ईश्वर के सभी गुणों का प्रत्यक्ष होता है , एक चेतन ही दूसरे चेतन को महसूस कर सकता है , इसी तरह ईश्वर को प्राप्त करके ही उसे पूर्ण रूप से जाना जा सकता है और उसके अस्तित्व का पूरा उपयोग लिया जा सकता है |

जिस प्रकार किसी भी वस्तु को जानने व प्राप्त करके उसका उपयोग लेने की वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है , उसी तरह ईश्वर को प्राप्त करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है , इस प्रक्रिया पर कभी और बात करेंगे , हाँ इतना जरूर कह दें की यह प्रक्रिया चमत्कार को नमस्कार करके बुद्धि बंद करने वाली नहीं बल्कि बुद्धि का पूर्ण प्रयोग करने वाली प्रक्रिया है , जिसमे पाखंड लेश मात्र भी नहीं है , इसलिए लेख को हम यही विराम देते है , आगे के विषयों पर बाद में लिखेंगे , ईश्वर के अस्तित्व पर आगे और भी नए लेख लिखे जायेंगे इसलिए आप हमारी website को Email से सब्सक्राइब कर सकते हैं | |

अब आप को क्या लगता है ईश्वर है या नहीं ?

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1 Comment

  1. मेरे हिसाब से ईश्वर हैं आप कर्ण पिशाचिनी के बिषय में क्या सोचते हैं बताएँ।

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