क्या किसी वस्तु को अनंत बार तोडना सम्भव है ? परमाणु क्या है ?

parmanu,परमाणु क्या है

परमाणु क्या है , atom और परमाणु दोनों में अंतर् है , अनेकों लोग atom को ही परमाणु समझते है , atom एक particle stage है जो स्वयं electron , proton , neutron से मिलकर बना है , लेकिन एटम , को हम परमाणु नहीं कह सकते | वास्तव में परमाणु क्या है ?

परमाणु क्या है ?

वैदिक दर्शन और वैदिक विज्ञान के अनुसार पदार्थ की वह सूक्ष्मतम अवस्था जिसे आगे तोडा नहीं जा सकता , जिसका आगे विभाग नहीं हो सकता और जो किसी अन्य वस्तु से मिलकर नहीं बना है |

ऐसी पदार्थ की अवस्था को परमाणु कहते है , परमाणु का शाब्दिक अर्थ हुआ परम सूक्ष्म |

कई बार व्यवहार के लिए भी अन्य संयोगजन्य पदार्थों को भी वैदिक दर्शन में परमाणु कह दिया जाता है , इसका कारण है कि अमुक पदार्थ कि अपनी stage में वह पदार्थ परम सूक्ष्म होता है आगे कि stage में पदार्थ की अवस्था बदल जाती है, लेख के अंत में इस बारे में आप जान पाएंगे | |

पदार्थ की वह अवस्था जो आगे कभी नहीं बदलती और जो परम सूक्ष्म है , उस परमाण्वीय अवस्था कि Vedic physics में प्रकृति कहा जाता है |

Atom को परमाणु क्यों समझा गया ?

जब John Dalton ने Atom की खोज की तब उसने कहा था की यह Atom आगे divide नहीं हो सकता |

इस कारण हमारे देश के लोगों ने भारतीय दर्शन के अनुसार इसे ही परमणु समझ लिया |

बाद में पता चला की यह Atom भी आगे अनेक भागों में विभाजित हो सकता है , लेकिन Atom का परमाणु नाम नहीं बदला गया |



अब हम अपने मुख्य विषय पर आते है कि क्या पदार्थ कि एक अंतिम अवस्था माननी चाहिए या ऐसी अवस्था नहीं होनी चाहिए , कई लोग मानते है कि पदार्थ की कोई अंतिम अवस्था नहीं होनी चाहिए हालाँकि विज्ञान ऐसा नहीं मानता इसलिए हम इसका वैज्ञानिक परीक्षण करते है |

परमाणु अवस्था संभव है या नहीं

परमाणु के विषय में यदि हम विचार करें तो दो प्रकार की धारणा उत्पन्न होगी |

परमाणु वह है जिसका आगे विभाग न हो इस विषय में दो सम्भावना है –

  1.  किसी भी कण का विभाग करते करते एक ऐसी अवस्था आएगी जिसमे आगे विभाग/टूटना न हो ।
  2.  ऐसी कोई अवस्था नही आएगी |

पहले मत को मानने पर प्रश्न एक भी नहीं आ सकता |

किन्तु दो सम्भावनाओ में दूसरी सम्भावना पर भी विचार करना आवश्यक है यदि दूसरी सम्भावना निरस्त हो जाये तो यह सिद्ध है की परमाणु नाम की अवस्था माननी ही पड़ेगी |

किन्तु कुछ लोग जिद से इस पारिभाषिक “परमाणु” को डाल्टन के एटम से जोड़ते है |

ध्यान रखिये परमाणु “एटम” नही है ।

अब हम दूसरी सम्भावना पर विचार करेंगे|

दूसरी सम्भावना में ऐसी कोई अवस्था नही हो सकती |

इस सम्भावना के समाधान में यह कहा जा सकता है की अणु के टुकडे होकर अन्य टुकड़ो के भी टुकड़े होते रहे और इसका कोई अंत न आये इसलिए ऐसी कोई अवस्था नही आएगी ।

इसे हम अनादि कारण अवधारणा कह सकते है किन्तु यह युक्तियुक्त(Logical) नही है |

कैसे ?

इसका विवेचन हम आगे करते है |

अनादि कारण विवेचना

अनादि(Beginning-less) कारण मानने का अर्थ क्या है |

इस पर विचार करने पर पता चलता है की जो अनादि है , वह अनंत भी होगा |

क्यों कि इसमें हमें मानना पड़ेगा कि अनंत या अनादि समय से वस्तुए बनती चली आ रही है , अतः कारण का प्रवाह अनादि होने पर कार्य का प्रवाह अनंत मानना पड़ेगा |

जिसका स्पष्ट सामान्य अर्थ होगा की अनादि समय से कारण से कार्य होता आ रहा है ,इसके लिए ऊपर दिए गए चित्र को देखकर समझें |

चित्र में जो वस्तु टूट रही है वो कार्य है और जो वस्तु जिस वस्तु या जिन भागों में टूट रही है वे कारण है |

जैसे घड़ा टूटने पर मिटटी में मिल जायेगा |

घड़ा कार्य है , मिटटी उसका कारण लेकिन अनादि कारण Theory में हर वस्तु कारण और कार्य दोनों बन जाएगी |



परमाणु विरुद्ध कल्पना पर प्रश्न

अब इस पर निम्न प्रश्न आएंगे |

1. उपरोक्त विवेचन और चित्र से स्पष्ट है की इस धारणा अनुसार अनादि समय से ” कारण से कार्य ” होता चला आ रहा है |
कारण से कार्य का अर्थ है सृजन और कार्य से कारण का अर्थ है विनाश – अर्थात अनादि समय से सृजन(Creation) चला आ रहा है – और अनंत समय तक सृजन ही चलेगा क्यों की प्रवाह “कारण से कार्य” की ओर है |

किन्तु ऐसा हमे ब्रम्हांड में ऐसा देखने में नही आता बल्कि ब्रम्हांड में सृजन के अलावा विनाश भी दिखाई देता है अतः यह धारणा मिथ्या सिद्ध होती है ।

2. कारण से कार्य का प्रवाह निरन्तर मानना पड़ेगा जिसका अर्थ हुआ की सृजन रुकना नही चाहिए किन्तु आप रेत को उठाकर देखिये , उसका प्रत्येक कण यदि इस प्रकार अनादि कारण से बना है तो वह कण आगे और क्यों नही बना , प्रत्येक कण आगे क्यों नही बना , प्रत्येक कण तक यह प्रक्रिया रुक क्यों गयी ??

3.चित्र से स्पष्ट है की जो किसी का कारण है वह किसी का कार्य भी है अतः प्रत्येक कण “कारण/कार्य” दोनों से नामांकित किया गया है
अब प्रश्न उठेगा कि यदि पृथ्वी अनादि कारण से बना कार्य है तो पृथ्वी भी “कारण और कार्य दोनो मानी जायेगी |
प्रश्न उठेगा पृथ्वी कार्य तो है किन्तु वह कारण किसका है ?
इसी प्रकार सूर्य चन्द्र ,ग्रह , उपग्रह, नक्षत्र आदि सब कार्य तो है किन्तु कारण किसके है ?

अनादि कारण मानने पर उपरोक्त प्रश्नों का कोई समाधान नही मिल सकता अतः प्रथम मत ही उचित है की परमाणु नाम की अवस्था को स्वीकार किया जाए ।

परमाणु के पक्ष में एक तर्क यह भी आएगा कि

क्योंकि सृजन का अंत है अतः शुरुआत भी होनी चाहिए

जो की सिद्ध करती कि

मूल का कोई मूल नही होता

इसलिए एक अंतिम अवस्था माननी पड़ेगी जो सबका मूल होगी , जिस से सब बने है और जो कभी बनी नहीं |


परमाणु की रश्मि अवस्था क्या है ?

वास्तव में परमाणु शब्द का मतलब यह नहीं कि परमाणु किसी particle जैसी stage में ही होना चाहिए |

अणु शब्द देखकर लोग समझते है कि यह कोई particle stage होनी चाहिए |

अणु शब्द का अर्थ होता है सूक्ष्म

ईश्वर के लिए भी कहा गया है

अणोर अणीयान महतो महीयान

यहाँ तात्पर्य है कि ईश्वर सूक्ष्म से भी सूक्ष्म है और बड़े से बड़ा भी है , इसलिए अणु का अर्थ सूक्ष्म लेना ही उचित है न कि particle जैसे stage

किसी वस्तु को तोड़ने के बाद particle स्टेज ख़त्म हो जाती है और फिर वह रश्मियों कि अवस्था में मिलता है |

Modern Science भी इसे strings कि form में मानती है |

यह रश्मियां भी आगे अन्य रश्मियों से मिलकर बनी होती है |

अंत में यह सिलसिला जाकर प्रकृति तत्व में में ख़त्म होता है जिसमे सारा matter अपनी परम् सूक्ष्म अवस्था में सम्पूर्ण ब्रम्हांड में फ़ैल जाता है |

रश्मियों के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़े

Vedic Rashmi Theory in Hindi

आशा है इस लेख में आपको नयी जानकारी मिली होगी , लेख पढ़ने के बाद इस बारे में आप क्या सोचते हैं , कमेंट में जरूर बताएं |

Summary
User Rating
5 based on 2 votes
Service Type
NA
Provider Name
NA,
Area
NA
Description
NA

Related Post

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*


error: Content is protected !!