आस्तिक और नास्तिक के बीच बहस

Aastik vs Nastik theist vs atheist



आस्तिक नास्तिक संवाद
नास्तिक – ईश्वर नाम कि कोई चीज नहीं है , यदि ईश्वर है तो उसे किसने बनाया है ?
आस्तिक – मित्र ईश्वर को किसी ने नहीं बनाया है , बनाया उसे जाता है जिसमे बनावट हो ईश्वर निराकार है |
नास्तिक – ईश्वर जैसे कोई चीज नहीं है , ब्रम्हांड कि रचना के लिए ईश्वर कि कोई आवश्यकता नहीं है |
आस्तिक – मित्र , यदि ऐसा है तो ब्रम्हांड को किसने बनाया ?
नास्तिक – ब्रम्हांड अपने आप बन गया ?
आस्तिक – अपने आप बनाने से पूर्व यह कौन सी अवस्था में था ?
नास्तिक – यह कैसा प्रश्न है ?
आस्तिक – प्रश्न तो अभी शुरू होगा , बनाने से पहले कोई न कोई अवस्था में तो होगा ही ?
नास्तिक – हाँ किसी अवस्था में तो होगा |
आस्तिक – तो फिर उस अवस्था को किसने बनाया ?
नास्तिक – वह अवस्था अनादि(Beginningless) है उसे किसी ने नहीं बनाया ?
आस्तिक – जब आप कहते हैं कि ईश्वर को किसी ने बनाया होगा तो हमारा भी यही सवाल है , आप कैसे कह सकते हैं कि उस अवस्था को किसी ने नहीं बनाया है ?
नास्तिक – तुम बताओ – ब्रम्हांड कैसे बना ?
आस्तिक – कोई भी बनी हुयी वस्तु बिना किसी के बनाये नहीं बनती , ब्रम्हांड बना हुआ है उसे बनाने वाला ईश्वर है | ईश्वर ने उसे वैज्ञानिक नियमों के अनुसार बनाया है |


नास्तिक – ईश्वर को किसने बनाया ?
आस्तिक – इसका उत्तर पहले दे आये हैं , ईश्वर निराकार है इसलिए उसका कोई कलाकार(Creator) नहीं है |
नास्तिक – ईश्वर ने दुनिया को किस Material से बनाया ?
आस्तिक – प्रकृति यानि पदार्थ कि मूल अवस्था(Material Cause) से बनाया |
नास्तिक – उस मूल अवस्था को किसने बनाया ?
आस्तिक – मूल का कोई मूल नहीं होता , इसलिए उसको किसी ने नहीं बनाया , जिस वस्तु में संयोग होता है उसका कोई निर्माण करने वाला होता है , मूल अवस्था संयोगजन्य नहीं है इसलिए उसका कोई कर्त्ता(Creator) नहीं , ईश्वर भी संयोगजन्य नहीं है उसका भी कोई कर्त्ता(Creator) नहीं है | पदार्थ कि मूल अवस्था ऊर्जा का मूल रूप है , रूप में परिवर्तन होता लेकिन ये ऊर्जा न तो कभी पैदा होती है , न ही कभी नष्ट होती है |
नास्तिक – इसी तरह हमारी मूल अवस्था को किसी ने नहीं बनाया , और उस मूल अवस्था से ब्रम्हांड अपने आप बना |
आस्तिक – मित्र , आप ये सिद्ध नहीं कर पाए थे कि उसको किसी ने नहीं बनाया , बल्कि हमने इसे सिद्ध किया है , चलिए , अब आगे बताइये कि यदि ब्रम्हांड अपने आप कैसे बना ?
नास्तिक – सृष्टि नियमों के द्वारा अपने आप बना |
आस्तिक – नियम होंगे तो नियामक भी होगा , management होगा तो manager भी होगा , आप नियमों को मानते है तो नियम खुद तो नियामक यानि कि law maker or Ruler को सिद्ध करते है | आप बताइये नियमों को किसने बनाया ?
नास्तिक – नियम अनादि है , किसी ने नहीं बनाया |
आस्तिक – नियम अनादि है तो नियामक यानि कि ruler भी अनादि हुआ |
नास्तिक – नहीं , नियम ही अनादि है |
आस्तिक – चलिए कोई बात नहीं , नियम अनादि है तो उन नियमों को कैसे पता कि कब उन्हें लागु (Apply) होना है ?
नास्तिक – अपने आप लागु होते है ?
आस्तिक – क्या अपने आप लागु होना उन नियमों का स्वभाव(Nature or Property) है ?
नास्तिक – हाँ


आस्तिक – अपने आप लागू होंगे तो किसी एक समय नहीं होंगे , बल्कि हमेशा लागु होते रहेंगे |
नास्तिक – हाँ, तो ब्रम्हांड कभी बना नहीं , हमेशा से है , और नियम हमेशा से लागु रहे हैं |
bramhand universe
आस्तिक – चलिए अब आपकी थ्योरी बदल गयी है , बताइये ब्रम्हांड अनादि कैसे हो सकता है ? ब्रम्हांड में निरंतर  विनाश देखने में आता है | सूर्य कि भी एक निश्चित आयु है , इस तरह हर वस्तु कि एक आयु है , सब कभी न कभी ख़त्म होंगे इसलिए ब्रम्हांड अनादि नहीं है |
नास्तिक – ब्रम्हांड ख़त्म नहीं होता बल्कि उसमे ग्रह , नक्षत्र ख़त्म होते रहते है , कही ग्रह नक्षत्र खत्म होते हैं तो कहीं उनका जन्म होता है इसलिए ब्रम्हांड अनादि है |
आस्तिक – ब्रम्हांड में ग्रहों का आधार उनका सूर्य होता है और सौर मंडलों का आधार गैलेक्सीज के बीच में black hole होता है इस तरह सबका कोई न कोई आधार है , तब सबका आधार भी कभी न कभी नष्ट होगा , क्यों कि संयोगजन्य वस्तु कभी अनादि नहीं हो सकती जैसे सूरज आदि नष्ट होते है वैसे सबका  ,ग्रह, नक्षत्र का आधार black hole भी कभी न कभी नष्ट होगा , और संयोगजन्य होने से अनादि नहीं हो सकता है |
नास्तिक – हाँ – फिर सत्य क्या है , ब्रम्हांड कैसे बनता है ?
आस्तिक – इसके लिए वैदिक रश्मि थ्योरी पढ़ो समझ जाओगे |

क्या आपके विचारों में कुछ परिवर्तन आया ?

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4 Comments

  1. Agar ishwar nirakar h to iski jankari manushyo ko kaise hui?
    Yadi ishwar nirakar h to eisa kyu h?
    Niyamak(manager) ko bhi to kisi ne bnaya hoga?
    Ishwar nirakar h to uska manvikaran ku kiya gaya?
    Uski murtiyo ko manavroop kyu diya gya?
    Yadi ishwar ne bhrammand ki rachna ki to use eisa karne ki avashyakta ku padi?
    Yadi sabka koi na koi adhaar h or wo adhaar nasht hota hai to is praka bramaand ka adhar jo ishwar h wo bhi to nasht hoga?

    • Ved ne bataya hai ki ishvar nirakar hai , ved ki bat kyun mane ? kyun ki ved ishvar ka hi knowledge hai , abhi ye kaise hai iske upar kabhi aur article dalenge.

  2. Ved ishwar ki knowledge hai iske kya pramaan h
    Ved shruti kahe jate h kyonki phle inhe peedhi dar peedhi suakar aage badhaya jatha tha.
    Agr aap koi baat kisi ko batate ho to 100th person tak pahunchte phunchte uska modification ho chuka hota hai
    To iski kya guarantee hai ki vartamaan vedon me vahi likha h jo moolrup me tha?

    Thank you.

    • iske bahut sare praman hai , ved ki koi bhi baat khud se katati nahi , ved me jo hai vo bramhand me hai aur jo bramhand me hai vo ved me hai , ye sab tabhi possible hai jab ved ishvar ki vaani ho. kyun creator khud hi bata sakta hai universe ke bare me.

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  1. ईश्वर का अस्तित्व है या नहीं , तर्क की कसौटी पर ईश्वर की खोज

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