जानिये ! आखिर क्यों है शरीर में ये अंग ?

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संसार का अनपढ़ से अनपढ़ व्यक्ति भी जानता है की शरीर में नाक , कान , मुंह और आंखे आदि क्यों है , सम्भव है की जानवर भी इतना तो जानते ही होंगे लेकिन इसी शरीर के बारे में दुनिया के बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति भी कुछ अंगों के रहस्य को नहीं जानते फिर सामान्य व्यक्ति का तो कहना ही क्या ? संसार में सामान्य वस्तुओं में असामान्य विज्ञान छुपा होता है – आज हम यह नहीं जानेंगे कि शरीर के अंग कैसे बने ? यह लेखक का विषय भी नहीं है लेकिन हम यह जानेंगे की यह अंग क्यों बना है ? हम “कैसे” पर नहीं , “क्यों” पर विचार प्रस्तुत करेंगे | आइये चलते है हम अपनी विचार यात्रा पर –

शरीर में कुछ अंग और हिस्से ऐसे हैं जिन पर सामान्यतः हम ध्यान नहीं देते लेकिन दुनिया में हर जगह व्यवस्था दिखाई देती है , चींटी से लेकर हाथी तक , राइ से लेकर पहाड़ तक , परमाणु से लेकर ब्रम्हांड तक ,सृष्टि के आदि से लेकर अंत तक व्यवस्थापक की व्यवस्था के दर्शन होते हैं , इसलिए हर वस्तु कुछ कहती है , अपने होने के बारे में बयां करती है , चाहती है कि कोई बुद्धिमान उसकी व्यवस्थित रचना को समझे , सृष्टि का हर कण , हर क्षण कुछ कह रहा है , जरूरत है उसे समझने की – तो आइये सुनते हैं हम सृष्टि की इस कथनी को –

कौन से अंग और हिस्से हैं जिनके बारे में हम थोड़े अनभिज्ञ हैं –

एक इंसान के शरीर को देखिये उसमे नाक , कान , आँख , मुंह ,हाथ और पैर प्रथम दृष्टि में देखने में आते हैं , लेकिन थोड़ा और गौर करें तो जिन अंगों और हिस्सों की जिज्ञासा हमें थी , वे अंग और हिस्से हैं – भौंहें ,आँखों के बाल ,नाक के नीचे बना हुआ एक मार्ग , होंठ और नाभि | लेखक इन अंगों और हिस्सों के बारे में जिज्ञासा करता हुआ खोज करते हुए जो पता लगाता है उसे आपके सामने लेखबद्ध कर रहा है , इनका क्रमशः वर्णन निम्न है –


नाभि – 



यह नाभि शब्द स्वयं ही स्वयं का वर्णन  कर रहा है यानि की नाभि शब्द का अर्थ ही है – केंद्र , नाभि के बारे में तो हर व्यक्ति जानता ही है की माँ के गर्भ में पल रहे बच्चे का पालन पोषण नाभि के माध्यम से होता है , माता की नाभि से शिशु की नाभि जुडी हुयी रहती है , इसलिए स्त्रियों में नाभि के दो प्रयोजन है , नाभि से स्त्री का गर्भ में पालन तो होता ही है ,साथ ही उसी स्त्री की नाभि से भविष्य में उसके बच्चे का पालन होगा , पुरुष में रहा एक प्रयोजन अर्थात गर्भ  में स्वयं का पालन , लेकिन नाभि के और भी प्रयोजन है – नाभि सभी नस नाड़ियो का केंद्र है , और विज्ञानं के अनुसार नाभि मनुष्य शरीर का centre of gravity यानि मनुष्य शरीर में गुरुत्वाकर्षण का केंद्र भी है , विज्ञान की इसी बात को संस्कृत शब्द ने प्रकट कर दिया कि नाभि का अर्थ है- केंद्र |


नाभि के बारे में कुछ तथ्य –

  1. नाभि मनुष्यों में ही नहीं पशुओं में भी होती है |
  2. नाभि स्तनधारी जीवों में होती है लेकिन , जो जीव स्तनधारी नहीं है उनमे अंडज जीवों में नाभि नहीं होती जैसे की मुर्गी में  |
  3. Carolina state university के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में पाया कि नाभि में १४०० प्रकार के बैक्टीरया पाए जाये है  |
  4. नाभि अलग अलग प्रकार की होती है लेकिन अधिकतर लोगों में यह अंदर की ओर रहती है किन्तु सिर्फ १० % लोगों में यह बाहर की ओर उभरी होती है |
  5. एडम और ईव को पहला मानव मानने वालों के अनुसार उनके नाभि नहीं थी |


आँख के बाल – 

हमारी आँखों के बाल एक बार टूटने पर वापस उग जाते हैं लेकिन इसमें एक से लेकर 6 महीने तक का समय भी लग सकता है ,ये टूटते और उगते रहते हैं ,ये समान्यतः हमारी आँखों में कचरा जाने से रोकते हैं लेकिन इसके अलावा इनके और भी कई प्रयोजन हैं –

  1. जानवरों में उनकी आँखों के बाल उनकी आँख की लम्बाई से तीन गुना कम होते हैं  , यह अनुपात उनकी आँखों में आने वाली वायु को बहाव देने के लिए पूर्ण है, ताकि आँखों में नमी बनी रहे ,इसे नीचे दिए गए चित्र में देखें , इंसान में भी इनका प्रयोजन यही है लेकिन यहाँ अनुपात थोड़ा अलग है |
  2. अगर कोई वस्तु आपके चेहरे के काफी करीब हो तो यह बाल उसे sense करके आपको तुरंत सक्रिय कर देते हैं जिससे की आपकी आँखों में  कीड़ा , मच्छर आदि न घुसे |
  3. ये बाल आपकी आँखों में पड़ने वाली प्रकाश किरणों को फ़िल्टर कर देते हैं  |
  4. कहने की आवश्यकता नहीं की ये आपकी सुंदरता को भी बढ़ाते हैं , और अलग अलग लोगों में इनकी आकृति अलग अलग देखी जाती है , घुमावदार आकृति आपको अधिक सुंदर बनाती है |

भौहें-



इसमें आप स्वयं समझ सकते हैं कि भौहें भी आपको सुंदर बनाती है लेकिन सिर्फ ईतना ही क्यों कुछ  और रहस्य भी छुपा है इनमे –

  1. इनकी आकृति ऐसी होती है कि सर पर आये पसीने या वर्षा में आये पानी को ये आँखों में नहीं जाने देते ,ऊपर चित्र में देखें कि पानी लुढ़क जाता है |
  2. ये आपके अलग अलग भाव को व्यक्त करने का भी एक जरिया बनते हैं |
  3. इनका कार्य आंख में कचरा जाने से रोकने का भी होता है |

नाक के नीचे का मार्ग –


इस हिस्से को मैं क्या नाम दूँ ? विज्ञान में इसे Philtrum कहा जाता है , मनुष्य में इसका क्या कार्य है यह तो कह नहीं सकते ,लेकिन जानवरों में यह उनकी सूँघने की शक्ति को बढ़ा देता है , हाँ मनुष्य में यह क्यों बनता है इसका उत्तर है की जब बच्चा पेट में बनता है ,तब उसके मुंह के विभिन्न भाग बनकर अंत में आपस में जब फिट होते हैं ,तब यह मार्ग बनता है ,  आप इसे इस वीडियो में देख सकते हैं |

होंठ-

होंठ प्रायः सभी प्राणियों में होते हैं लेकिन छिपकली के बारे में कहा जाता है की उसके होंठ नहीं होते ,होठों से मुंह पूरा बंद होता है क्योंकि इनकी आपस में पकड़ बनती है , एक हाथी की सूंड उसके ऊपरी होठों का फैलाव होती है , होठों के निम्न कार्य है –

  1. इनसे खाने के चबाने और निगलने में मदद मिलती है |
  2. एक दूसरे से बात करने में भी मदद मिलती है , ओष्ठव्य वर्ण (प ,फ ब …) का उच्चारण इन्ही से होता है  |
  3. मुस्कुराने के लिए
  4. बच्चे को दूध पीने के लिए , होठ के बिना चूंसने का कार्य नहीं हो पायेगा |

इस तरह हमने सफ़लतापूर्वक इस विषय का विश्लेषण किया ,सम्भव है कि इनमे से कई बातें आपको पता होंगी लेकिन इनमे कई नई बातें भी आपको मिली होगी , ऐसी हम आशा करते हैं , और इस लेख को विराम देते है , जानकारी अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें |


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